हक़ बात - सबके साथ
{ मुसलमानो में शिर्क फैलने के जराए }
1 क़ुरआन और सहीह अहादीस के इल्म में दूरी होना ,
जहालत (अज्ञानता) होना।
2 अपने उलेमा और बड़े बुजुर्गो की अंधी तक़लीद करना।
3 नेक लोगो की ताज़ीम में गुलु (अतिश्योक्ति) करना।
4 पक्की क़ब्रें , उर्सो पर मेला और क़ब्रो पर क़ुरबानी नजर/मन्नत
5 जानतेर (ज्योतिष,काहिंन,नजूमी) के पास जाना
6 तावीज़, गंडे,नक्श,कड़ा वगेरह का इस्तेमाल
नॉट : इनसे एक अल्लाह को मानने वाला शिर्क करने लग जाता है
अल्लाह पर कम और फ़र्ज़ी बाबाओ पर ज्यादा यकीन हो जाता है
और जाहिल लोग उन्हें ही अपना सब कुछ मान बैठते है।
{ मुसलमानो में शिर्क फैलने के जराए }
1 क़ुरआन और सहीह अहादीस के इल्म में दूरी होना ,
जहालत (अज्ञानता) होना।
2 अपने उलेमा और बड़े बुजुर्गो की अंधी तक़लीद करना।
3 नेक लोगो की ताज़ीम में गुलु (अतिश्योक्ति) करना।
4 पक्की क़ब्रें , उर्सो पर मेला और क़ब्रो पर क़ुरबानी नजर/मन्नत
5 जानतेर (ज्योतिष,काहिंन,नजूमी) के पास जाना
6 तावीज़, गंडे,नक्श,कड़ा वगेरह का इस्तेमाल
नॉट : इनसे एक अल्लाह को मानने वाला शिर्क करने लग जाता है
अल्लाह पर कम और फ़र्ज़ी बाबाओ पर ज्यादा यकीन हो जाता है
और जाहिल लोग उन्हें ही अपना सब कुछ मान बैठते है।
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