एक शख़्स ने कहा ,
हराम ना खाओ सूद का पैसा इस्तेमाल ना करो ये तुम्हारी दुनिया और आख़िरत तबाह ओ बरबाद कर देंगे ।
दूसरे शख़्स ने जवाब दिया ,
अमा चलो तुम बहुत हराम हलाल करते हो साले सब मौलवी लोग खाएं तो कुछ नहीं ,सारे फतवे हमारे लिए ही हैं ,वो फलाना मौलवी ज़कात की रक़म खाता है ,फलाना मौलवी चंदा हज़म कर जाता है,फलाना मौलवी ईदगाह की ज़मीन पर कारोबार कर के माल अंदर कर रहा है,फलाना मौलवी फलाने शख़्स को ₹दो लाख दिये है और हर महीने ₹बीस हज़ार लेते हैं वो हराम नहीं है ?
दूसरे शख़्स ने जवाब दिया ,
अमा चलो तुम बहुत हराम हलाल करते हो साले सब मौलवी लोग खाएं तो कुछ नहीं ,सारे फतवे हमारे लिए ही हैं ,वो फलाना मौलवी ज़कात की रक़म खाता है ,फलाना मौलवी चंदा हज़म कर जाता है,फलाना मौलवी ईदगाह की ज़मीन पर कारोबार कर के माल अंदर कर रहा है,फलाना मौलवी फलाने शख़्स को ₹दो लाख दिये है और हर महीने ₹बीस हज़ार लेते हैं वो हराम नहीं है ?
पहला शख़्स मुस्कुरा के बोला ,
मौलाना अपनी क़ब्र में जायेंगे तुम और हम अपनी क़ब्र में जायेंगे ,मौलाना के आमाल का हिसाब तुम से या हम से नहीं मांगा जायेगा,हर शख़्स अपने अमल के लिए ज़िम्मेदार है ।
मौलाना अपनी क़ब्र में जायेंगे तुम और हम अपनी क़ब्र में जायेंगे ,मौलाना के आमाल का हिसाब तुम से या हम से नहीं मांगा जायेगा,हर शख़्स अपने अमल के लिए ज़िम्मेदार है ।
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