सर के कुछ हिस्से मुंढना
हज़रत इब्ने उमर र. अ. से रिवायत है कि
रसूलुल्लाह ﷺ ने क़ज़ा
(यानि सर के हिस्से के कुछ बाल मुंढ़ने से और कुछ के छोड़ने )
से मना फ़रमाया है। "
( हवाला - सहीह बुखारी : 5921, बाबुल क़ज़ा )
हज़रत इब्ने उमर र. अ. से रिवायत है कि
रसूलुल्लाह ﷺ ने क़ज़ा
(यानि सर के हिस्से के कुछ बाल मुंढ़ने से और कुछ के छोड़ने )
से मना फ़रमाया है। "
( हवाला - सहीह बुखारी : 5921, बाबुल क़ज़ा )
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