Wednesday, 5 April 2023

 अठारहवां पारा


 इस पारे के तीन हिस्से हैं:

 1  सूरह मोमिनून पूरी

 2.  सूरह नूर पूरी

 3.  सूरह फुरक़ान शुरू का हिस्सा


1.  सूरह मोमिनून में सात चीज़ें हैं:

 1.  इस्तेहक़ाक़ ए जन्नत (स्वर्ग के लिए पात्रता) की सात सिफ़त

 2. तखलीक़ ए इंसान (मानव निर्माण) के नौ चरण

 3.  तौहीद 4. अम्बिया के क़िस्से 5. नेक लोगों के चार गुण

 6.  न मानने वालों के इनकार का असली कारण

 7.  फैसले का दिन


1. इस्तेहक़ाक़ ए जन्नत (स्वर्ग के लिए पात्रता) की सात सिफ़त : (1) ईमान, (2) नमाज़ में खुश (विनम्रता) , (3) लगु से बचना (4) ज़कात, (5) पाकदामनी (6) ईमानदारी, (7) नमाज़ की हिफाज़त


 2.  मानव निर्माण के नौ चरण: पिछले पारे में सात बयान हुआ : 8. मौत 9. फिर से ज़िन्दा किया जाना


 3.  तौहीद:

 सूरह की शुरुआत में तौही के लिए तीन दलाइल  दिए गए हैं: (1) आसमानों की तखलीक़ (2) बारिश और अनाज, (3) चौपाए और उनका मुनाफा।


4.  अम्बिया के क़िस्से :

 (1) हजरत नूह अलैहिस्सलाम और उनकी नाव का ज़िक्र।

 (2) हजरत मूसा और हारून अलैहिस्सलाम का ज़िक्र।

 (3) हजरत ईसा अलैहिस्सलाम और उनकी मां हजरत मरियम का ज़िक्र।


 5.  अच्छे लोगों के चार गुण:

 (1) वे अल्लाह से डरते हैं, (2) वे अल्लाह पर ईमान रखते हैं, (3) वे शिर्क और रिया नहीं करते, (4) नेकियों के बावस्फ  उनके दिलों में डर होता है कि उन्हें अल्लाह के पास जाना है।


 6. न मानने वालों के इंकार की असली वज़ह :

 उनके इंकार और झुठलाने की वजह ये नहीं कि आप ﷺ कोई ऐसी बात लेकर आए जो पहले अम्बिया नहीं लेकर आए बल्कि असली कारण यह है कि आप जो हक़ बात लेकर आए हैं वह उनकी ख्वाहिशात के खिलाफ़ है इसलिए वे उसे नकारने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते रहते हैं।


 7.  फैसले का दिन:

 क़ियामत के दिन जिसके आमाल का तराज़ू वज़नी हो जाएगा वह सफल होगा और जिसका आमाल हल्का होगा वह असफल होगा।


(2) सूरह नूर में दो बातें हैं:

 1.  सोलह अहकाम और आदाब

 2.  अहले हक़ व बातिल की तीन मिसालें


 1. सोलह अहकाम और आदाब

 1. ज़ानी और ज़ानिया की सज़ा सौ कोड़े हैं, (अविवाहितों के लिए है)

 2. मुसलमानों के लिए निकाह के लिए किसी बदकार पुरुष या महिला को चुनना हराम है।

 3. जो कोई भी बिना गवाहों के एक समझदार, बालिग, पाकदामन पुरुष या महिला पर ज़िना का आरोप लगाता है, उसकी सजा अस्सी कोड़े हैं

 4. मियां बीवी के लिए बजाए गवाहों के लआन का हुक्म है

 5. जब कुछ पाखंडियों ने सैय्यदा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर बोहतान लगाया, जो कि एक बोहतान था , जो मुसलमानों की रूहानी माँ पर लगाया गया था अल्लाह तआला ने दस आयतों में इस घटना का ज़िक्र किया है, इन आयतों में मुनाफिकीन की मजम्मत की गई है और मुसलमानों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस तरह की बोहतान तराशी का हिस्सा न बनें और हरमे नबूवत की इफ्फत व असमत का ऐलान हुआ 

 6. किसी के घर में बिना अनुमति के प्रवेश न करें, अनुमति से पहले सलाम भी करना चाहिए।

 7. आंखों और शर्म गाह की हिफाज़त करें।

 8. निकाह की She's

 9. जो गुलाम या बांदी रूपये पैसा देकर आज़ाद होना चाहें उनसे मुहायदा कर लें

 10. बांदियों का उज़रत के बदले ज़िना पर मजबूर न करें

 11. छोटे बच्चों और घर में रहने वाले गुलामों और नौकरों को फज्र की नमाज़ से पहले, दोपहर के क़ैलूला के समय और ईशा की नमाज़ के बाद तुम्हारे  खलवत वाले कमरे में दाखिल हों तो उन्हें इजाज़त लेकर प्रवेश करना चाहिए, क्योंकि ये तीनों समय, उमूमी लिबास उतारकर  सोने के कपड़े पहनना आम बात है।

 12. जब बच्चे बालिह हो जाते हैं, तो उन्हें अन्य बालिगों की तरह, अनुमति लेकर या किसी भी तरह से अपने आगमन की इत्तेला दें

 13. उन स्त्रियों पर कोई आपत्ति की बात नहीं जो बहुत बूढ़ी हो गई हों और जिनकी आयु विवाह योग्य न हो गई हो यदि वे पर्दा हटा दें।

 14. घर में दाखिल हौं तो परिवार को सलाम करें।

 15. बिना अनुमति के इज्तेमाई महफिल से न उठें।

 16. अल्लाह के रसूल को इस तरह न पुकारो जैसे एक दूसरे को पुकारते हैं।


 2. अहले हक़ और बातिल की तीन मिसालें :


पहली मिसाल में मोमिन के दिल को नूर के उस चिराग के साथ तशबीह दी गई जो साफ सफ्फाफ शीशे से बनी हुई क़ंदील (दीपक) में होता है और जो एक आला में रखा जाता है ताकि इसकी रोशनी एक निश्चित आयाम में बनी रहे। इसमें तेल एक विशेष जैतून के पेड़ से प्राप्त किया जाता है, इस तेल में ऐसी चमक होती है कि यह बिना आग दिखाए चमकने लगता है , मोमिन के दिल का भी यही हाल है वह ज्ञान प्राप्त करने से पहले ही हिदायत पर अमल पैरा होता है, फिर जब ज्ञान आता है तो नूर अला नूर की सूरत हो जाती है


 एक और मिसाल उनके आमाल झूठ हैं, जिन्हें वो अच्छा समझते हैं उनकी मिसाल शराब की सी है जैसे प्यासा आदमी दूर से शराब को पानी समझ बैठता है और पास आता है तो पानी नदारद ऐसे ही काफिर का मामला है जब वह मरने के बाद अल्लाह के सामने पेश होगा, तो कुछ भी नहीं होगा, उसके आमाल गायब और गुबार बन के उड़ चुके होंगे


 तीसरी मिसाल में उनके अक़ाइद की तुलना समुद्र के गहरे अँधेरे से की गई है, जहाँ इंसान को अपना हाथ भी दिखाई नहीं देता, यही हाल काफिर का है जो कुफ्रऔर ज़लालत के अँधेरे में भटकता रहता है


 (3) सूरह फुरकान के शुरुआती हिस्से में चार चीजें हैं:

 (1) तौहीद

 (2) कुरान की प्रामाणिकता

 (3) रिसालत

 (4) क़यामत


 (1) तौहीद:

 अल्लाह ही है जो आसमानों और ज़मीन का बादशाह है, उसका न कोई बेटा है और न कोई साझीदार, उसी ने हर चीज़ को बनाया और उसे नपा तुला अंदाज दिया है।


 (2) कुरान की हक़्क़ानियत (प्रामाणिकता) :

 कुरआन के बारे में काफिरों की दो तरह की गलत बयानी का ज़िक्र किया गया है:

 1.  यह मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की इफ्तेरा है और उनकी अपनी रचना है जिसमें कुछ अन्य लोगों ने योगदान दिया है।

 2.  ये पिछली क़ौमों के क़िस्से और कहानियाँ हैं जो उसने लिखवा ली हैं।


 (3) रिसालत:

 काफिरों ने सोचा कि रसूल इंसान नहीं फरिश्ता होता है और इंसानों में से किसी एक को भी नबुव्वत और नबुव्वत मिल भी जाए तो दुनियावी नज़र से अमीरों को दिया जाता है, ग़रीबों और यतीमों को नहीं दिया जा सकता  अल्लाह तआला ने उनके इस झूठे ख़याल का साफ़ दलीलों से खण्डन किया है।


 (4) क़यामत :

 क़ियामत के दिन अल्लाह काफ़िरों के झूठे माबूदों से पूछेगा: क्या तुमने मेरे इन बन्दों को गुमराह किया या ये ख़ुद ही गुमराह हो गए?  तो वे अपने बन्दों को झुठलायेंगे और अपनी लापरवाही कबूल करेंगे, फिर उन काफ़िरों को भारी सज़ा मिलेगी।

 सतरहवां पारा


इस पारे के दो हिस्से हैं:

 1.  सूरह अम्बिया पूरी

 2.  सूरह हज पूरी


 ❶ सूरह अंबियाह में तीन चीज़ें हैं:

 1.  क़यामत का का दिन

 2.  रिसालत

 3.  तौहीद


 1. क़यामत का दिन:

 बताया गया है कि क़यामत का दिन और हिसाब का समय बहुत करीब आ गया है, लेकिन इस भयानक दिन के से लोग गफलत में पड़े हैं।(1)

 क़ियामत के क़रीब याजूज और माजूज को खोल दिया जाएगा और वो हर बुलंदी से दौड़ रहो होंगेभी (96) और मुशरिकीन और उनके बुत क़यामत के दिन जहन्नम के ईंधन होंगे (98)


 2.  रिसालत :

 इसके ज़िमन (संदर्भ) में सत्रह पैगम्बरों का ज़िक्र किया गया है: (1) हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम (2) हज़रत हारून अलैहिस्सलाम (3) हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम (4) हज़रत लूत अलैहिस्सलाम (5) हज़रत इसहाक अलैहिस्सलाम (6) हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम (7) हज़रत नूह अलैहिस्सलाम (8) हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम (9) हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम (10) हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम (11) हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम (12) हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम (13) हज़रत ज़ुल किफ्ल अलैहिस्सलाम (14) हज़रत यूनुस  अलैहिस्सलाम (15) हज़रत ज़कारिया अलैहिस्सलाम (16) हज़रत याह्या अलैहिस्सलाम (17) हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम

 इन सत्रह में से कुछ नबियों के क़िस्से का ज़िक्र तफ्सील से है बाकी का मुख्तसर

 पिछले पैगम्बरों की कहानियाँ सुनाने के बाद कहा गया कि मुहम्मद, अल्लाह के रसूल ﷺ दीन और दुनिया में सारे जहान  के लिए एक रहमत हैं आपने अल्लाह का पैगाम इंसानों तक पहुंचा दिया मगर जब हर तरह के दलाइल के बाद भी लोग न समझें तो आप ने अल्लाह से दुआ की, यह सूरा इसी दुआ पर  खत्म होती है, वो दुआ है :

”رَبِّ احْكُم بِالْحَقِّ ۗ وَرَبُّنَا الرَّحْمَ۔ٰنُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ“


 "ऐ मेरे रब! हक़ का फैसला कर दीजिये और हमारा रब बहुत रहमत वाला है, और वही है जिसे तुम जो कुछ बनाते हो, उनके मुक़ाबले में उसी की मदद दरकार है।”


3.  तौहीद :

 तौहीद पर छह दलाइल का ज़िक्र है:

आसमान और ज़मीन आपस में मिले हुए थे, हमने उन्हें अलग-अलग कर दिया।

हमने हर जानदार को पानी से बनाया है।  हमने ज़मीन में पहाड़ बना दिए, ताकि लोगों के बोझ से ज़मीन न हिले।

हमने लोगों के चलने के लिए ज़मीव में चौड़े रास्ते बनाए।  हमने आसमान को सुरक्षित छत बनाया।  दिन, रात, सूरज और चांद का एक निज़ाम बनाया , हर एक अपनी कक्षा में बहुत तेज गति से घूम रहा है, न तो टकरा रहा है और न ही मिल रहा रहा है।


 ❷ सूरह हज में छह चीजें हैं:


 1.  क़ियामत: (क़ियामत की हौलनाकी (भयावहता) को दिल दहला देने वाला ज़िक्र किया गया है।)


 2.  इंसान की तख़लीक़ के सात मराहिल (चरण) : (1) मिट्टी (2) मनी (वीर्य) (3) रक्त का लोथड़ा (4) बोटी (5) बच्चा (6) जवान (7) बूढ़ा

 

 3.  जातीयता और मज़हब के लिहाज से छह गिरोह: मुस्लिम, यहूदी, साबी (तारों के उपासक), ईसाई, मजूसी (सूरज, चंद्रमा और आग के पुजारी), मुशरिक ।


 4.  हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का ऐलान ए हज : (हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम) जबल अबी क़ैस पर खड़े हुए और हज का ऐलान किया, इस ऐलान को अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उन लोगों तक पहुँचाया जो ज़मीन व आसमान और में रहते हैं।


 5.  ईमानवालों की चार निशानियाँ: (1) अल्लाह से डरना, (2) तकलीफ़ में सब्र करना, (3) नमाज़ का पालन करना, (4) भलाई के रास्ते पर ख़र्च करना।


 6.  दीगर (अन्य) अहकाम: मसलन, मानसिक ए हज, इकामत-ए-सलात, जकात की अदायगी, जानवर की क़ुर्बानी और जिहाद वगैरह


Muhammad Yasir

Tuesday, 4 April 2023

 सोलहवां पारा


इस पारे में तीन हिस्से हैं 

1. सूरह कहफ़ का बाक़ी हिस्सा

2. सूरह मरियम पूरी 

3. सूरह ताहा पूरी


❶ "सूरह कहफ के बाकी" हिस्से में दो चीजें हैं:

 1.  हज़रत मूसा और खिज़्र अलैहिस्सलाम का क़िस्सा  (जो पंद्रहवें पारे के अंत में शुरू होता है और सोलहवें पारे के शुरुआत में समाप्त होता है)

 2.  ज़ुल-करनैन की क़िस्सा


 ¤ 1.  हजरत मूसा और खिज़्र अलैहिस्सलाम सलाम का क़िस्सा :

 जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने इत्तिला दी कि दरिया के किनारे एक शख़्स है जिसे ऐसा इल्म है कि तुम्हारे पास नहीं है तो तुम उसकी तलाश में जाओ तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम निकल पड़े, चलते चलते समंदर के किनारे पहुंचे जहां आपकी मुलाक़ात खिज़्र अलैहिस्सलाम से हुई आपने उनके साथ रहने की इजाज़त मांगी तो उन्होंने इस शर्त के साथ इजाज़त दी कि आप कोई सवाल नहीं करेंगे फिर तीन अजीब वाक़्यात पेश आए .... पहले वाक़िये में खिज़्र अलैहिस्सलाम ने उस कश्ती के तख्ते को तोड़ डाला जिसके मालिकों ने उन्हें किराया लिए बगैर बिठा लिया था , दूसरे वाक़िये में एक बच्चे का क़त्ल कर डाला, तीसरे वाक़िये मेें एक ऐसे गांव में गिरती हुई पोशीदा दीवार की तामीर शुरू करदी जिस गांव वालों ने उन्हें खाना तक खिलाने से इंकार कर दिया... 

हज़रत मूसा अलैहि अस्सलाम तीनों मौकों पर चुप नहीं रह सके और उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया??

तीसरे सवाल के बाद खिज्र अलैहिस्सलाम ने कहा कि आप मेरे साथ नहीं चल सकते और तीनों वाक़्यात की हक़ीक़त उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम को बताई , फरमाया कि कशती का तख्ता इसलिए तोड़ा कि आगे ज़ालिम बादशाह के कारिंदे खड़े थे और वो हर नई कशती को जबरदस्ती छीन रहे थे  और ऐसा करने ये कशती ज़ालिमों के पास जाने से बच गई,

और उनका ज़रिया ए मआश महफूज़ रहा, बच्चे को इसलिए क़त्ल किया क्योंकि वो बड़ा होके माता-पिता के लिए एक बड़ा फितना बन सकता था, जिसके कारण वह उन्हें कुफ्र की नजाशत में मुब्तिला कर देता,इसलिए अल्लाह ने उसे मारने का और उसकी जगह नेक सालेह औलाद देने का फैसला फरमाया, गिरी हुई दीवार इसलिए बनाई गई थी क्योंकि यह दो अनाथों की थी, उनके पिता अल्लाह के अच्छे बंदे थे, दीवार के नीचे खजाना छिपा हुआ था, अगर दीवार गिर जाती तो लोग खजाना ले जाते और उसे बेच देते, हमने इसे तामीर कर दिया ताकि वो जवान हों तो इस खजाने को निकाल सकें और इसे काम में लगा सकें... 


¤ 2.  ज़ुल-करनैन का क़िस्सा :

 वह जबरदस्त वसाइल (संसाधनों) वाला एक बादशाह थे, उनका गुज़र ऐसी क़ौम से हुआ जो एक अन्य ज़ालिम क़ौम द्वारा उत्पीड़न का शिकार बन गयी थी, जिसे कुरान ने "याजूज" और "माजूज" नाम दिया, ज़ुल-करनैन ने याजूज-माजूज पर एक दीवार खड़ी कर दी है, अब वह कुर्ब ए कयामत में ज़ाहिर होंगे


 ❷ सूरह मरयम में करीब 11 पैगम्बरों का जिक्र है:

 तीन पैगंबरों का तफ्सीली ज़िक्र है:

 1.  हज़रत याहया अलैहि अस्सलाम का जन्म (अल्लाह ने हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम और उनकी बीवी को बुढ़ापे में औलाद दी और उसे नुबूवत से सरफराज़ किया) 

 2.  पैगंबर ईसा अलैहिस्सलाम का जन्म (अल्लाह तआला ने पैगंबर ईसा अलैहिस्सलाम को बिना बाप के जन्म दिया और उन्हें तुरंत ही बोलने की ताक़त अता की)

 3.  हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का अपने पिता को दावत देना (शिर्क न करें, अल्लाह ने मुझे ज्ञान दिया है, मेरी बातों को मान लें, शैतान की बातों को न मानें, वह अल्लाह का नाफरमान है, उसकी मानेंगे तो अल्लाह का अज़ाब आएगा) 


 बाकी आठ पैगम्बरों का ज़िक्र या तो बहुत मुख्तसर में या सिर्फ उनके नाम ज़िक्र किया गया है:

 4. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम 5. हज़रत हारून अलैहिस्सलाम 6. हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम 7. हज़रत इसहाक़ अलैहिस्सलाम 8. हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम 9. हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम 10. हज़रत आदम अलैहिस्सलाम 11. हज़रत नूह अलैहिस्सलाम


 ❸ सूरह ताहा में तीन चीजें हैं:

 1.  तसल्ली ए रसूल 2.  हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का क़िस्सा  3. हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का क़िस्सा


 ¤ 1. तसल्ली ए रसूल :

 रसूलुल्लाह ﷺ दावत और इबादत दोनों में अपनी जान झोंक रखी थी और जब कोई इस दावत पर ध्यान नहीं देता है, तो आप निराश हो जाते हैं, इसलिए अल्लाह करीम ने आपको कई जगहों पर दिलासा दिया है, यह भी समझाया गया कि आप खुद को बहुत परेशानी में न डालें, इस क़ुरआन से हर किसी के दिल को प्रभावित नहीं किया जा सकता है, यह केवल के उसके लिए नसीहत है जिसके दिल में अल्लाह का डर है...


मूसा अलैहिस्सलाम का जो क़िस्सा इस पारे में बयान हुआ है उसको ज़हन नशी करने के लिए कई उन्वान क़ायम किए जा सकते हैं..

जैसे अल्लाह के साथ बात करने का सम्मान, नदी में फेंक दिया जाना, फिरौन द्वारा ताबूत पाया जाना, आपको पूरे सम्मान और सम्मान के साथ गोद लेने के लिए सच्ची माँ को लौटाना, आपसे एक क़ब्ती का क़त्ल हो जाना, लेकिन अल्लाह को आपको क़िसास से बचाना, कई वर्षों तक मदीना में रहना, अल्लाह आपको और आपके भाई हज़रत हारून अलैहिस्सलाम फिरौन के साथ अच्छे अंदाज में बात चीत करने का हुक्म, प्रतियोगिता के लिए जादूगरों का जमावड़ा, हजरत मूसा अलैहिस्सलाम की जीत, जादूगरों का ईमान लाना, पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम के नेतृत्व में मिस्र से इस्राएलियों का रातों रात का पलायन, फिरौन का आगमन सेना का पीछा करना और समंदर में फिरौन और उसकी सेना का डूब जाना और अल्लाह की नेमतों के मुक़ाबला में की इस्राईलियों की नाशुक्री, सामरी का बछड़ा बनना का 

 और इस्राईलियों की गुमराही, तौरात लेकर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की तूर से वापसी , अपने भाई पर गुस्से का इज़हार, हज़रत हारून अलैहिस्सलाम की वज़ाहत वगैरह......... 


 3.  हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का क़िस्सा

 अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया और मस्जूद ए मलाइका बनाया, तमाम फ़रिश्तों ने सजदा किया, लेकिन शैतान ने सज्दा करने से मना कर दिया, अल्लाह ने फपमाया ये तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुश्मन है जन्नत में रहो यहां सब आराम है, तुम न भूखे होते हो, न नंगे, न प्यासे और न धूप से तड़पते हो , बस फलां पेड़ के पास मत जाओ, लेकिन शैतान ने एक फुसफुसाहट पैदा की, हज़रत आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम ने उस पेड़ से खा लिया अल्लाह ने उन्हें जन्नत से निकाल दिया, उन्होंने अल्लाह से माफ़ी मांगी , अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया...


Muhammad Yasir

 पंद्रहवां पारा


■ इसके दो हिस्से हैं:


 1. सूरह बनी इस्राईल पूरी


 2. अधिकतर सूरह कहफ़


 ● (1) सूरह बनी इस्राईल में 6 चीज़ें हैं:

1. वाक़्या ए मेअराज  2. बनी इस्राइल की दो बड़ी तबाहियाँ 

3. तेरह अहकाम  4. तकरीम ए इंसान  5. रिफ़अत ए क़ुरआन 

6. अज़मत ए रहमान


 ▪ 1. वाक़्या ए मेअराज

 हमारे पैगंबरﷺ को रात के वक़्त मस्जिद हराम से मस्जिद अक्सा और फिर वहां से आसमानो पर ले जाया गया जहां से नमाज़ जैसी इबादत मिली


 ▪2.  बनी इज़राइल की दो बड़ी तबाही

 बनी इस्राईल को पहले ही बता दिया गया था कि तुम लोग ज़मीन में दो बार फ़साद फैलाओगे, चुनांचे जब उनकी बद बख्तियां हद से बढ़ गईं तो बाबुल का बादशाह बख्त नसर उनपर मुसल्लत किया गया सत्तर साल वो गुलामी में रहे फिर ईरान के बादशाह ने बाबुल पर हमला करके फतेह कर लिया तो उसने यहूदियों पर रहम खाकर उन्हें आजाद कर दोबारा फिलिस्तीन में बसा दिया कुछ मुद्दत खुशहाल ज़िन्दगी गुजारने के बाद फिर नाफरमानी पर उतर आए तो फिर एक और शख्स ने हमला करके यहूदियों का क़त्ल ए आम किया , बनी इस्राईल पर अलग अलग ज़माने में कई दुश्मन मुसल्लत रहे मगरइन दो का ज़िक्र क़ुरआन में है जिनसे इनको सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ा... 


 ▪ 3. तेरह अहकाम: (आयतें: 23 से 39)

 अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो, माँ बाप पर मेहरबानी करो, रिश्तेदारों पर रहम करो, ग़रीबों और राहगीरों को उनका हक़ दो, अपना माल बर्बाद मत करो, कंजूस मत बनो, हद से आगे मत बढ़ो, अपने बच्चों को गरीबी के डर से क़त्ल न करो हर, किसी जानदार को नाहक़ क़त्ल मत करो, किसी अनाथ की संपत्ति का दुरुपयोग मत करो, वादा करो और इसे पूरा करो, नाप तौल पूरा करो, जिसके बारे में तहक़ीक़ न हो उसके पीछे मत पड़ो, ज़मीन पर अकड़ कर मत, अल्लाह का शरीक न ठहराओ


 ▪ 4. तकरीम ए इंसान 

इंसान को अशरफुल मख़लूक बनाया गया 


  5. रिफ़अत ए क़ुरआन


क़ुरआन की अज़मत के साथ साथ क़ुरआन थोड़ा थोड़ा नाज़िल होने की हिकमत बयान हुई ताकि लोगों के लिए समझने में आसानी हो और हालात और वाक़्यात के हिसाब से आयतों को उतारा गया... 


  6. अज़मत ए रहमान 


अल्लाह के अच्छे अच्छे नामों में से चाहे जिस नाम से पुकारो , न उसकी कोई औलाद न कोई शरीक , न ही उसे किसी मआविन की ज़रूरत 


 ● (2) सूरह कहफ़ के शुरुआती हिस्से में दो बातें हैं:

 1.  दो क़िस्से

 2. दो मिसालें


▪ 1. दो क़िस्से : असहाब ए कहफ़ का क़िस्सा 


ये कुछ साहिब ए ईमान नौजवान थे जिन्हें दकियानस नाम के एक राजा द्वारा बुतपरस्ती करने के लिए मजबूर किया गया था, और उसकी बात न मानने वाले को मार डालता था, एक तरफ नौजवानों को माल ओ दौलत ऊंचे ओहदे वगैरह का लालच दिया गया दूसरी तरफ क़ुबूल न करने पर जान से मारने की धमकी दी गई , उन नोजवानों ने ईमान की हिफ़ाज़त के लिए वहां से निकल गए और चलते चलते दूर एक गार में पहुंच गए रास्ते में एक कुत्ता भी उनके साथ हो लिया उन्होंने इसी गुफा में रहने का इरादा किया, और जब वो गार में दाखिल हुए तो अल्लाह ने उन्हें गहरी नींद सुला दिया वहां वो तीन सौ साल तक सोते रहे और जब बेदार हुए तो भूख लगी उनमें से एक खाना लेने बाहर गया तो सब बदल चुका था  अहल-ए-शिर्क की हुकूमत खत्म हो गई थी और अबू मुवह्हिद लोग सत्ता में थे, ईमान की खातिर घर बार छोड़ने वाले ये नौजवान उनकी नजरों में क़ौमी हीरो की हैसियत अख्तियार कर गए... 

   ¤ हजरत मूसा और खिज्र अलैहिस्सलाम का क़िस्सा : इसका जिक्र अगले पारे की शुरुआत में किया जाएगा।


   ▪ 2. दो मिसालें:

   पहली मिसाल : दो लोग थे, एक के पास बगीचा था और दूसरा एक गरीब आदमी था, बगीचे वाला अकड़ता था तो गरीब ने कहा अकड़ नहीं "माशाअल्लाह, ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" कहा करो मगर वो न माना, अल्लाह का अज़ाब आया और उसका सारा बाग जल गया... 


   ¤ दूसरी मिसाल : दुनियवी ज़िन्दगी की मिसाल ऐसी है जैसे जब आसमान से पानी बरसता है तो धरती हरी हो जाती है, फिर सूख कर चूरा चूरा हो जाती है


Muhammad Yasir

Sunday, 2 April 2023

चौदहवां पारा 


इस पारे में दो हिस्से हैं:

 1.  सूरह हिज्र पूरा

 2. सूरह नहल पूरा


 (1) सूरह हिज्र में चार चीज़ें हैं:


 ▪ 1.  काफ़िरों की ख्वाहिश (आख़िरत में जब काफ़िर मुसलमानों को मज़े में और खुद को अज़ाब में देखेंगे तो ये ख़्वाहिश करेंगे कि काश हम भी मुसलमान हो जाते)


 ▪ 2.  कुरान की हिफाज़त (अल्लाह ने क़यामक तक के लिए क़ुरआन की हिफाज़त की जिम्मेदारी ली है)


 ▪ 3. इंसान की तख़लीक़ (अल्लाह ने मनी (वीर्य) से इंसानों का निर्माण किया, फ़रिश्तों का मस्जूद बनाया, शैतान मरदूद हुआ , उसने क़यामकत के दिन तक लोगों को गुमराह करने की क़सम खाई)


 ▪ 4.  तीन क़िस्से


पहला क़िस्सा

 फ़रिश्ते हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के पास आए और उन्हें एक बेटे की ख़ुशख़बरी दी। उस वक़्त उनकी बीवी बहुत बूढ़ी थी, जाहिर तौर पर वह बच्चे पैदा करने की उम्र की नहीं थी, तो वह ख़ुशख़बरी सुनकर खुश भी थे और हैरान भी एक बेटे के बारे में। उन्होंने कहा, "हम आपको सच्ची खुशखबरी सुना रहे हैं, आप मायूस न हों तो उन्होंने कहा मायूस होना तो सिर्फ गुमराहों का काम है


 ¤ दूसरा क़िस्सा

 इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ख़ुशख़बरी देने के बाद फ़रिश्ते हज़रत लूत की ख़िदमत में आए और उनसे गुज़ारिश की कि वह अपने परिवार को अपने साथ ले जाएँ और रात को इस शहर को छोड़ दें, क्योंकि आपके शहर के बाशिंदे गुनाहों की सरकशी में वे यहां तक ​​चले गए हैं कि अल्लाह ने उनके नापाक वजूद से ज़मीन को पाक करने का फैसला किया है, इन लोगों की जड़ सुबह होते होते कट जाएगी।


तीसरा क़िस्सा:

 असहाबुल हिज्र, इनसे मुराद क़ौम ए समूद के लोग हैं, ये लोग भी ज़ुल्म और ज़्यादती की राह चल पड़े थे, बार-बार समझाने के बावजूद, वे बुतपरस्ती छोड़ने को तैयार नहीं थे, उन्हें कई चमत्कार दिखाए गए, खास तौर से एक ऊंटनी की  पहाड़ से विलादत हुई जो कई मोजज़ों का मजमूआ थी, चट्टान से ऊंटनी का आना, उसका जसामत में बड़ा होना में बहुत ज्यादा दूध का हासिल होना, लेकिन उन बद बख्तों ने उस मोअजज़े की कोई क़द्र नहीं की , उन्होंने इसे देखकर विश्वास करने के बजाय इस ऊंटनी को मार डाला, इसलिए वादी ए हिज्र के लोग भी अजाब की चपेट में आए... 


(2) सूरह नहल में पाँच चीज़ें हैं:


 ▪ 1.  तौहीद (एकेश्वरवाद) 

 अल्लाह तआला ने ज़मीन को फ़र्श और आसमान को छत बनाया, मर्द को वीर्य से पैदा किया, चौपायों को पैदा किया, जिसके कई फ़ायदे हैं और जो अपने मालिक के लिए शान और ख़ूबसूरती का सबब हैं, घोड़े, खच्चर और गधे पैदा किए, ले सवारी और ज़ीनत के लिए काम आते हैं।  वही बारिश करता है, फिर उसी बारिश से वह जैतून, खजूर, अंगूर और बहुत से फल और अनाज पैदा करता है, उसने रात और दिन, सूरज और चांद को इंसान की खिदमत में लगा रखा है, वह नदियों से ताजा गोश्त और मोतियां ,जेवर मुहय्या करता है समुद्र में जहाज और कश्तियाँ उसी के आदेश से चल रही हैं।  अगर तुम अल्लाह की नेअमतों को गिनना चाहो तो गिन नहीं सकते।


 ▪ 2. रिसालत:

 नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को आदेश दिया गया है कि लोगों को हिकमत और अच्छे उपदेश के साथ अल्लाह की ओर बुलाएं और उस रास्ते में आने वाले मसाएब पर सब्र करें।  साथ ही आपको सब्र और तंगदिल न होने की तलकीन की गई


 ▪ 3.  शहद की मक्खी

 मधुमक्खी का तरीक़ा बड़ा अजीब होता है वो अल्लाह के हुक्म से अपना छत्ता पहाड़ों और दरख्तों में बनाती है वो तरह तरह के फलों का रस चूसती है फिर अल्लाह उनसे शहद निकालता है जिसका रंग अलग अलग होता है और इस शहद में अल्लाह ने इंसानों की बीमारी के लिए शिफ़ा रखी है।


 ▪ 4. जामेअ आयत

 इस सूरा की आयत 90 में तीन चीज़ों का हुक्म और तीन चीज़ों की मनाही है: इबादत और मामलों में अदस, सबके साथ अच्छा सुलूक और रिश्तेदारों के साथ सहयोग, और वाज़ेह बुराई, मना किए गए कार्यों और गलत कामों को करने से रोका गया है।


 ▪ 5.  हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की तारीफ


 हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ज़िन्दगी भर तौहीद पर जमे रहे पैगंबर अलैहिस्सलाम को उनकी मिल्लत की इत्तेबा का हुक्म दिया गया...


Muhammad Yasir

 तेरहवां_पारा 


इस पारे में तीन हिस्से हैं:


 1.  सूरह यूसुफ की आखिरी आयात 

 2.  सूरह राद पूरा

 3.  सूरा इब्राहिम पूरा


 (2) सूरह राद में पाँच चीज़ें हैं:

 1.  कुरान की प्रामाणिकता

 2.  तौहीद

 3.  फैसले का दिन

 4.  रिसालत

 5.  मुतक़ीन के आठ गुण और अशक़ियाह के तीन लक्षण


 2. तौहीद

 वह स्वर्ग और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा, रात और दिन, पहाड़ों और नदियों, अनाज और विभिन्न रंगों के फल, स्वाद और गंध, और मृत्यु और जीवन, लाभ और हानि का निर्माता है ये सब अकेले उसके हाथ में ही हैं।  अल्लाह ने इंसानों की हिफाजत के लिए फरिश्तों को नियुक्त किया है।

3. फैसले का दिन:

 मुश्रिकों आश्चर्य करते हैं कि मृत हड्डियों में जीवन कैसे डाला जाएगा, जबकि वास्तव में आश्चर्य का कारण मृत्यु के बाद जीवन नहीं है, लेकिन ये लोग आश्चर्य से जो कहते हैं वह आश्चर्यजनक है।


 4. रिसालत

 प्रत्येक राष्ट्र के लिए कोई न कोई रसूल और नबी भेजा जाता है।


 5.  मुतक़ीन की आठ विशेषताएँ और अश्क़ियाह की तीन निशानियाँ:

 एक नेक व्यक्ति के आठ गुण हैं: (1) वफादारी (2) दया (3) ईश्वर का भय (4) आखिरत का भय (5) सब्र (6) नमाज की पाबंदी(7) सदक़ा (8) बुराई का बदला अच्छाई से

 पाखंड के तीन लक्षण: (1) वादा खिलाफी (2) क़ता रहमी(3) फ़साद फिल अर्ज़


 (3) सूरह इब्राहिम में पाँच चीज़ें हैं:

 1. तौहीद

 2. रिसालत

 3.  फैसले का दिन

 4. कुछ अहम बातें

 5.  छह दुआएं


1. तौहीद

 सारे आसमान और ज़मीन को अल्लाह ने पैदा किया, उसने आसमान से पानी बरसाया, फिर ज़मीन से इंसानों के लिए तरह-तरह के फल निकाले और पानी की सवारी और नहरों को इंसानों के अधीन कर दिया और सूरज और चाँद और रात को अपने अधीन कर लिया और दिन मनुष्यों के लिए काम में लगाओ, क्योंकि अल्लाह ने वह दिया है जो लोग मांगते हैं, उसके एहसान और नेमतें इतनी अधिक हैं कि एक इंसान के लिए उन्हें गिनना पासिबल नहीं है।


2. रिसालत

 यहां कुछ बातें विचार करने के लिए हैं:

 1.  नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तसल्ली के लिए बताया गया है कि पिछले पैगम्बरों से भी उनकी क़ौमों ने तिरस्कार, इनकार, दुश्मनी और विरोध का वही रवैया अपनाया, जो आपकी क़ौम अपना रही है।

 2.  हर नबी अपने लोगों की भाषा जानता है।

 3.  पिछली क़ौमों के कज़्ज़ाबों के कुछ शुब्हात :

 (1) अल्लाह तआला के अस्तित्व के बारे में सन्देह (2) मनुष्य रसूल नहीं हो सकते (3) पूर्वजों की नकल।  इन संदेहों का खंडन किया गया है।


 3.  फैसले का दिन:

 अविश्वासियों के लिए नरक और विश्वासियों के लिए स्वर्ग का वादा है।  जन्नत की नेमतों और जहन्नुम की हौलनाकियों का उल्लेख है।  क़ियामत के दिन हिसाब के बाद शैतान गुमराहों से कहेगा कि ख़ुदा ने तुम से जो वादा किया था वह सच्चा था और जो वादा मैंने तुमसे किया था वह झूठा था, मैंने तुम पर ज़ोर नहीं डाला, तुम खुद ही बहकावे में आए, अब मुझे दोष देने के बजाय खुद को दोष दो।


 4.  कुछ अहम बातें

 (1) शुक्र नेमतों को बढ़ा देती है और नाशुक्रों के लिए अल्लाह की ओर से कड़ी यातना है।

 (2) अविश्वासियों के कर्म उस राख के समान हैं जिसे तेज हवा उड़ा ले जाती है।

 (3) हक़ और ईमान का कलमा पाक़ीजा दरख्त के समान होता है, इसकी जड़ बहुत मजबूत होती है और इसका फल बहुत मीठा होता है, और असत्य और ज़लालत की बात नापाक वृक्ष के समान होती है, इसके लिए इसकी घोषणा नहीं की जाती है और वह निष्फल होता है।

 (4) अल्लाह ज़ालिमों के कामों से अनजान नहीं है।


 5. छह दुआएं

 हजरत इब्राहिम (शांति उस पर हो) ने अपने भगवान से छह प्रार्थनाओं का उल्लेख किया:

 (1) शांति (2) मूर्तिपूजा से बचाव (3) सलात का क़याम (4) दिलों का मैलान (5) रिज़्क़ (6) मगफिरत


Muhammad Yasir

Saturday, 1 April 2023

 बारहवां पारा 


इसके दो हिस्से हैं

 1.  सूरा हूद पूरा (इसकी पहली पांच आयतें ग्यारहवें पारे में हैं)

 2.  सूरह यूसुफ की 52 आयात


 (1) सूरह हुद में चार चीजें हैं:

 1.  पवित्र कुरान की महानता

 2.  तौहीद और तौहीद के दलाइल

 3.  रिसालत और अम्बिया के वाक़्यात

 4.  क़यामत का ज़िक्र


 1.  कुरान की महानता:


 (1) कुरान अपनी आयतों, अर्थों और विषयों की दृष्टि से एक मजबूत किताब है, और इसे किसी भी तरह से तहरीफ़ नहीं किया जा सकता है, न ही इसमें कोई विरोध या विरोधाभास है। इसकी ताकत का मुख्य कारण यह है कि इसकी व्याख्या उसी ने की है जो बुद्धिमान और ज्ञानी दोनों है, उसका हर काम किसी न किसी ज्ञान पर आधारित है और उसे मनुष्य के भूत, वर्तमान, भविष्य, उसके मनोविज्ञान, कमजोरियों और जरूरतों का अच्छा ज्ञान है।

 (2) क़ुरआन का खंडन करने वालों को चुनौती दी गई है कि यदि क़ुरआन वास्तव में मानवीय है तो आप भी इसी प्रकार के दस सूरह बनाकर लायें।


 2.  तौहीद और तौहीद के तर्क:

 वह अल्लाह है जो सभी प्राणियों को जीवन देता है, चाहे वे मनुष्य हों या जिन्न, मवेशी हों या पक्षी, पानी में रहने वाली मछलियाँ हों या पृथ्वी पर रेंगने वाले कीड़े हों, आकाश और पृथ्वी को अल्लाह ने बनाया है।


 3. रिसालत के ज़िमन में सात अम्बिया के वाक़्यात

 (1) हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को उनके लोगों ने नहीं माना, कुछ को छोड़कर, उन्होंने अल्लाह के आदेश से कश्ती बनायी, मोमिन सुरक्षित रहे, बाकी डूब गए।

 (2) हजरत हूद अलैहिस्सलाम उनकी क़ौम के जो लोग ईमान लाए कामयाब हुए और बाक़ी सब लोगों पर अल्लाह का अज़ाब आ गया (आँधी के रूप में)।

 (3) हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम के लोगों के अनुरोध पर अल्लाह ने पहाड़ से एक ऊंटनी निकाली लेकिन लोगों ने उसे मार डाला, और अल्लाह की सजा उन पर आ गई।

 (4) हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की बीवी को अल्लाह ने उनके बुढ़ापे में एक बेटा इस्हाक दिया तो उनका एक बेटा याकूब अलैहिस्सलाम हुए 

 (5) हजरत लूत अलैहिस्सलाम उनकी क़ौम के लोग दुष्ट थे, उनका झुकाव औरतों की जगह लड़कों की ओर था, कुछ फ़रिश्ते ख़ूबसूरत नौजवानों का रूप बनाकर हज़रत लूत के पास आए, उनकी क़ौम के दुष्ट लोग भी वहाँ पहुँच गए, हज़रत लूत अलैहिस्सलाम ने उन्हें समझाया। लड़कियों से शादी करो, लेकिन वे नहीं माने, उन पर अल्लाह की सजा आ गई, यह बस्ती जमीन से उठा कर उलट दी गई और उन पर पत्थरों की सजा गिरा दी गई।

 (6) हज़रत शोएब अलैहिस्सलाम की क़ौम के लोग नाप तौल में कमी करते थे, जो लोग पैगम्बर की आज्ञा का पालन करते थे वे बच जाते थे, नाफ़रमानों पर चीख़ का अज़ाब आया

 (7) हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दावत को फ़िरऔन ने ठुकरा दिया, अल्लाह ने उसे और उसके साथियों को नाकाम कर दया


4. क़यामत का ज़िक्र

 क़ियामत के दिन दो तरह के लोग होंगे: (1) बदनसीब लोग (2) नेक लोग


 खुशनसीबों के लिए अल्लाह ने हमेशा जन्नत में बेशुमार नेमतें रखी हैं और बद बख्तों के लिए अज़ाब


दूसरा हिस्सा


 (2) सूरह यूसुफ में, हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का तफ्सीली वाक़्या की  है:


कुरान में तमाम पैगम्बरों की कहानियां बिखरी पड़ी हैं, लेकिन हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम की पूरी कहानी इसी सूरे में है। 


हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की कहानी:

हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम के बारह बेटे थे, हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम बहुत हसीन  थे, उनके पिता हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम उनके चरित्र और रूप दोनों की सुंदरता के कारण उनसे बेहद प्यार करते थे।  एक बार हजरत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने एक सपना देखा और अपने प्यारे पिता को अपना सपना बताया कि ग्यारह सितारे और चाँद और सूरज मुझे सजदा कर रहे हैं। उनके पिता ने उन्हें मना किया था कि वह इस सपने को अपने भाइयों को न बताएं। इस वजह से भाइयों को जलन हुई, वे हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को अपने पिता से तफरीह का कहकर  जंगल में ले गए और एक कुएँ में गिरा दिया। एक काफिले ने उन्हें वहां से निकाला काफिला मिस्र गया और बेचा अजीज़ ए मिस्र ने उन्हें अपने यहां रख लिया जवान हुए तो अजीज-ए-मिस्र की बीवी आपके इश्क में गिर गई उसने बुराई की दावत दी आप ने ठुकरा दी अजीज ए मिस्र ने बदनामी से बचने के लिए आपको जेल में डाल दिया, यहां तक ​​कि जेल में भी  दावत-ए-तौहीद का सिलसिला जारी रखा, जिसके कारण कैदी उसका सम्मान करते थे। एक ख्वाब की सही ताबीर के बाद अजीज ने मिस्र , उसने आपको राजकोष, व्यापार और राज्य का स्वतंत्र मंत्री बनाया, मिस्र और गर्दूपेश में अकाल के कारण, आपके भाई अनाज लेने के लिए मिस्र आए, कुछ वक्त आपने उनसे कहा कि मैं आपका भाई यूसुफ हूँ, फिर आपका माता-पिता भी मिस्र आ गए और वे सब यहीं बस गए... 


हज़रत यूसुफ़ के क़िस्से से सबक़ :

 (1) साहचर्य के बाद राहत मिलती है।  (2) ईर्ष्या एक भयानक रोग है।  (3) अच्छे संस्कार हर जगह काम आते हैं।  (4) पवित्रता सभी अच्छाई का स्रोत है।  (5) गैर-महरम पुरुषों और महिलाओं का इख्तेलात तन्हाई में नहीं किया जाना चाहिए। (6) ईमान की बरकत से परेशानी आसान हो जाती है।  (7) विपत्ति को पाप से अधिक तरजीह दी जानी चाहिए।  (8) दाई जेल में भी दावत देता  है।  (9) तोहमत लगाने से बचना चाहिए।  (10) सबने उसकी गवाही दी जो सत्य पर थाः अल्लाह तआला, स्वयं हज़रत यूसुफ़, अज़ीज़ मिस्र की पत्नी, औरतों ने, अज़ीज़ मिसर के परिवार के एक फर्द ने

 ग्यारहवां_पारह 


इस पारे के दो भाग हैं:


 1.  सूरह तौबा की 32 आयात 

 2. सूरा यूनुस पूरा


(1) सूरह तौबा के बाक़ी हिस्से में तीन चीज़ें हैं:


 1.  मुनाफिक़ीन की निंदा

 2.  मोमिनीन के नौ गुण

 3.  तीन ईमानदार साथी जिन्होंने तबुक की लड़ाई में भाग नहीं लिया


1. मुनाफिक़ीन की निंदा:

 अल्लाह तआला ने अपने नबी को तबूक की लड़ाई में भाग न लेने के बारे में मुनाफिक़ीन के झूठे बहानों के बारे में आगाह किया, और मुनाफिकों ने मुसलमानों को परेशान करने के लिए मस्जिद ज़िरार बनाई थी और अल्लाह ने पैगंबर को इसमें खड़े होने से मना किया था, नबी अलैहिस्सलाम के हुक्म से इसे जला दिया गया था


 2.  मोमिनीन के नौ गुण:

 (1) तौबा करने वाले (2) इबादत करने वाले (3) हम्द करने वाले (4) रोज़ा रखनने वाले (5) रुकू करने वाले (6) सजदा करने वाले (7) नेकी करने वाले (8) बुरी बातों से मना करने वाले 9. अल्लाह के अहकाम पर अमल करन वाले 


 3.  तीन सच्चे साथी जिन्होंने तबुक की लड़ाई में भाग नहीं लिया की तौबा का वाक़्या

 (1) हजरत काब बिन मलिक रज़ि (2) हजरत हिलाल बिन उमय्या रज़ि (3) हजरत मारारा बिन रबी रज़ि

 ये तीनों गज़वह ए तबूक में शरीक नहीं हुए इन तीनों का पचास दिनों के लिए बहिष्कार किया गया, फिर उनकी तौबा का ऐलान वही को ज़रिए हुआ इनके नाम याद रखने के लिए 


 (2) सूरह यूनुस में चार बातें हैं:


 1.  तौहीद (अल्लाह ही राज़िक़ (पालनहार), मालिक (पालनकर्ता), ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) और तमाम तदबीरें (सर्वनियोजक) करने वाला है। आयत: 31)

 2.  नबुव्वत (और हज़रत नूह, हज़रत मूसा, हज़रत हारून और हज़रत यूनुस (उन पर शांति हो) की कहानियों का ज़िक्र (उल्लेख) इस ज़िमन (संदर्भ) में किया गया है)

 3.  क़यामत (क़यामत के दिन सब इकट्ठे होंगे। आयत: 4, काफ़िर इस पर ईमान नहीं रखते। आयत: 11)

 4.  कुरान की महानता


2. नुबुव्वत के तहत चार नबियों का क़िस्सा बयान हुआ है


1.. हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़िस्सा


 हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को दावत दी, उन्होंने ठुकरा दी, सिवाय कुछ लोगों के, अल्लाह ने मोमिनों को नूह (अलैहिस्सलाम) की नाव में महफूज़ रखा और बाकी सब नाफरमानों को डूबो दिया।


2&3. हज़रत मूसा और हारून अलैहिस्सलाम का क़िस्सा


 अल्लाह  ने पैगंबर मूसा और हारून अलैहिस्सलाम को फिरौन के पास भेजा, फिरौन और उनके लोगों ने नहीं सुना, लेकिन फिरौन ने खुदा होने का दावा किया, पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम पर  को एक जादूगर कहा और अपने जादूगरों को उनके साथ मुक़ाबला करने के लिए लाया जादूगर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाए, फिर अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा और हारून अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया कि मिस्र में अपने लोगों के लिए घर और मस्जिदें बनाएं और मस्जिदो में सब नमाज़ अदा करें। फ़िरौन और उससे लोग बनी इस्राएल का पीछा करते हुए, समुद्र में डूब गए। अल्लाह ने बनी इस्राएल के क़बीलों के लिए समुद्र में रास्ते बनाए।


4. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम


 उन्हीं के नाम पर इस सूरह का नाम "सूरह यूनुस" रखा गया है।  हजरत यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम कुरान में चार बार सराहतन यूनुस आया है (सूरह निसा, अनआम, यूनुस और साफ्फात में) और दो जगहों पर (सूरह यूनुस और सूरह क़लमम में) अल्लाह ने उन्हें मछली वाला किया है ( साहिब अल-हवत / ज़न्नून ), की सिफत के साथ ज़िक्र किया है

हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम के वाक़िये के दो पहलू हैं:

एक उनका मछली के पेट में जाना, सूरह साफ्फात में इसका तफ्सील से ज़िक्र है।

दूसरा, उनकी गैरमौजूदगी में उनकी क़ौम का तौबा इस्तेगफ़ार करना सूरह यूनुस में इशारा (इंगित) किया गया है।

क़िस्सा :

 हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम अपने लोगों  से निराश थे और अल्लाह की सज़ा को निश्चित रूप से देखते हुए, उन्होंने "नीनवेह" की ज़मीन छोड़ दी। हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम समुद्र में कूद गए, एक बड़ी मछली ने उन्हें निगल लिया, अल्लाह ने उन्हें मछली के पेट में भी ज़िन्दा रखा, कुछ दिनों के बाद मछली ने उसे किनारे पर उगल दिया। क़ौम के पुरुष और महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी रेगिस्तान में चले गए और रोने (विलाप करने) लगे और तौबा की और माफ़ी मांगी और सच्चे दिल से ईमान क़ुबूल किया, जिस वजह से अल्लाह का अज़ाब उन पर से टल गया।

 दसवां पारा


 इस पारा के दो भाग हैं:

 1.  सूरह अंफाल की आखिरी 35 आयात

 2.  सूरह तौबा का शुरुआती हिस्सा


1. सूरह अंफाल की आखिरी 35 आयात में पांच अहम बातें हैं 


1. माल ए गनीमत का हुक्म 2. गज़वह ए बदर के हालात 3. अल्लाह की नुसरत के असबाब 4. जंग से जुड़ी हिदायात

5. हिजरत और नुसरत के फजाइल


1. माल ए गनीमत का हुक्म


माल ए गनीमत के बारे में कहा गया कि पांचवां हिस्सा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का उनके रिश्तेदारों, यतीमों, ग़रीबों और मुसाफ़िरों के लिए है और बाक़ी के चार हिस्से मुजाहिदीनों के लिए हैं। 


 2. गज़वह ए बदर के हालात


  1. काफ़िर मुसलमानों को और मुसलमान काफ़िरों को संख्या में कम मानते थे और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस युद्ध का होना अल्लाह द्वारा तय किया गया था।

  2. शैतान मुशरिकों को मज़ीन करके उनके कर्मों को प्रस्तुत करता रहा, दूसरी ओर फरिश्ते मुसलमानों की सहायता के लिए आसमान से उतरे।

  3. बद्र की लड़ाई में कुरैश को ज़लील व ख्वार 


3. अल्लाह की नुसरत के असबाब

जंग के मैदान में साबित क़दमी

कसरत से अल्लाह तआला का जिक्र 

विवाद और लड़ाई-झगड़ों से दूर रहें

नमुवाफिक़ उमूर पर सब्र


4. जंग से जुड़ी हिदायात


माद्दी और रूहानी हर ऐतबार से तैयारी पूरी रखो

अगल काफिर सुलह की तरहफ माएल हों तो सुलह करलो


5. हिजरत और नुसरत के फजाइल


मुहाजिरीन और अंसार सच्चे मोमिनीन हैं

गुवाहों की मगफिरत

रिज़्क़ ए करीम का वादा


दूसरा हिस्सा 


सूरह तौबा की शुरुआती 93 आयात में तीन अहम बातें हैं 


1. मुश्रिकीन से बराअत 2. ज़कात के मसारिफ 3. मुनाफिकीन की मजम्मत


1. मुश्रिकीन से बराअत


मुश्रिकीन से बराअत का ऐलान हुआ और उन्हें इस्लाम क़ुबूल करने या जज़ीरा नुमा अरब से बाहर जाने के लिए कई मोहलतें दी गईं जिन्हें चार कैटेगरी में तक़सीम कर उनके अमल और मुआहिदे के हिसाब से मोहलतें दी गईं 


2. ज़कात के मसारिफ़


सूरह तौबा की आयत नम्बर आठ में ज़कात के 8 मसारिफ़ बयान किए गए हैं 

1. फ़ुक़राअ 2. मिसकीन 3. सदक़ात वसूल करने वाले अहेलकार 4. वह लोग जिन्हें दिलदारहदी मक़सूद है 5. गुलामों को आज़ाद कराने के लिए 6. मक़रूज़ 7. अल्लाह की राह में 8. मुसाफिरीन


3. मुनाफिक़ीन की मजम्मत


मुसलमानों और मुनाफिक़ीन में इम्तियाज़ करने वाली चीज़ गज़वह ए तबूक बनी जिसमें मुसलमान तो चले गए मगर मुनाफिक़ीन बहाने तराशने लगे

 नवां पारा ( قَالَ المَلَاُ )


 इस पारा के दो भाग हैं:


 1.  सूरह आराफ का बाक़ी भाग

 2.  सूरह अनफाल का शुरुआती हिस्सा


 (1) सूरह आराफ के शेष भाग में छह चीजें हैं:

 1.  हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की विस्तृत कहानी।

 2.  अहद का ज़िक्र

 3.  बिलाम बिन बावरा की कहानी

 4.  सभी कुफ्फार मवेशियों की तरह हैं

 5.  क़यामत का इल्म कोई नहीं जानता सिवाय अल्लाह के 

 6.  कुरान की अज़मत (महानता) 


1. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की विस्तृत कहानी


इस पारे में तकरीबन 6 नबियों के ज़िक्र के साथ मूसा अलैहिस्सलाम का क़िस्सा तफ्सील से बयान हुआ है... 


2. अहदुल्लस्त का ज़िक्र


अल्लाह तआला ने इंसानों को दुनिया में भेजने से पहले ही उनसे अपनी फरमाबरदारी का वादा ले लिया था, (जब वह चूंटिया के बराबर जिस्म रखते थे), कि वह अल्लाह तआला को अपना रब मानते हैं??? तो सबने इसका इक़रार किया...... 


 3. बिलआम बिन बावरा का क़िस्सा :


 मिस्र की विजय के बाद जब बनी इस्राईल को जबरीन के लोगों से जिहाद छेड़ने का आदेश मिला, तो जबारीन डर गए और कुछ करने के लिए बिलआम बिन बावरा के पास आए उसके पास इस्म ए आज़म था पहले तो उसने मना किया मगर जब उन्होंने उसे रिश्वत दी, तो वह बहक गया और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और बनी इस्राईल के ख़िलाफ़ बद्दुआ करने लगा लेकिन ख़ुदा की क़ुदरत से वो बातें खुद उनके और जाबारीन क़ौम के ख़िलाफ़ निकली, अल्लाह ने उसकी ज़ुबान निकालकर उसे उन्हें कुत्ते जैसा बना दिया, एक कुत्ते की तरह... 


6. क़ुरआन की अज़मत


जब क़ुरआन पढ़ा जाए तो कान लगाकर सुनो और खामोश रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए


दूसरा हिस्सा


2. सूरह अनफाल के शुरुआती हिस्से में तीन बातें हैं:

 1.  बद्र की लड़ाई और माल ए गनीमत का हुक्म

 2. मोमिनीन के पांच गुण

 3. मोमिनीन से छह बार खिताब


1. बद्र की लड़ाई और माल ए गनीमत का हुक्म


गज़वह ए बदर इस्लाम और कुफ्फार के बीच पहले मारके की हैसियत रखती है जिसमें अल्लाह ने मुसलमानों को फतह अता की और क़ुरैश ए मक्का को ज़िल्लत और रुस्वाई उठानी पड़ी , अल्लाह ने अपने इनमात गिनवाए और मुसलमानों की हिम्मत और हौसला बढ़ाया और कुछ कमियों की तरह इशारा भी किया और आगे के लिए हिदायात भी दिए जो नुसरत और फतेह का सबब बन सकती हैं, जिहाद और माल ए गनीमत की तक़सीम का भी हुक्म बयान किया गया क्योंकि मुसलमानों में इसको लेकर बाहमी इख्तेलाफ़ हो गया था... 


 मोमिनीन के पांच गुण हैं:

 (1) अल्लाह का डर (2) तिलावत (3) विश्वास (4) नमाज़  (5) सख़ावत


3. मोमिनीन से छह बार खिताब


 (1) आयत: 14 (हे ईमान वालो! युद्ध के मैदान में काफिरों की लड़ाई से मुंह मत मोड़ो)

 (2) आयत: 20 (ऐ ईमान वालों! अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा मानो)

 (3) आयत: 24 (हे ईमान वालो! जब अल्लाह और उसका रसूल तुम्हें किसी काम के लिए बुलाए तो उनका आदेश मानो). 

 (4) आयत: 27 (ऐ ईमान वालो! अल्लाह और रसूल से बेवफाई न करो, न अपनी अमानतों से)

 (5) आयत: 29 (ऐ ईमान वालों! यदि तुम अल्लाह से डरते हो, तो वह तुम्हें मुमताज़ करेगा और तुम्हारे गुनाहों को माफ करेगा)

 (6) आयत: 45 (ऐ ईमान वालों! जब दुश्मन का सामना करना पड़े, तो साबित क़दम (दृढ़) रहो और अल्लाह को याद करो)

 आठवां पारा 


इस पारे में दो हिस्से हैं :


1. सूरह अनआम की 55 आयात

2. सूरह आराफ की इब्तेदाई 87 आयात


सूरह अनआम की 55 आयात में ये चार अहम बातें हैं


1. तसल्ली ए रसूल  2. मुश्रिकीन की चार हिमाकतें

3. अल्लाह की दो नेअमतें  4. दस नसीहतें


1. तसल्ली ए रसूल


इस सूरत में रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली दी गई है कि ये लोग जिद्दी हैं मोअजज़े का बेजा मुतालबा करते रहते हैं, और अगर मुर्दे भी उनसे बातें करें तो फिर भी ईमान नहीं लाएंगे हालांकि क़ुरआन का मोअजज़ा ईमान लाने के लिए काफी है... 


2. मुश्रिकीन की चार हिमाकतें


1. ये लोग चौपायों में अल्लाह तआला का हिस्सा और शुरकाअ (जिसे अल्लाह का शरीक बनाया जाए) का हिस्सा अलग अलग कर देते हैं, शुरकाअ के हिस्से को अल्लाह के हिस्से मिलने न देते लेकिन अगर अल्लाह का हिस्सा शुरकाअ के हिस्से में मिल जाता तो उसे बराबर न समझते... 


2. गरीबी के डर से बेटियों को क़त्ल कर देते 

3. चौपायों की तीन क़िस्में बना रखी थीं , एक दो उनके बड़े और पेशवा लोगों के लिए मखसूस, दूसरा जिसपर सवार होना मना था, तीसरे वह जिन्हें गैरुल्लाह के नाम से जिबह करते थे

4. चौपाए के बच्चों को औरतों पर हराम समझते और अगर वह बच्चा मुरदा होता तो औरत और मर्द दोनों के लिए हलाल समझते... 


3. अल्लाह की दो नेअमतें


1. खेतियां      2. चौपाए (चार पैर वाले जानवर) 


4. दस नसीहतें


1. अल्लाह के साथ किसी को शरीक न किया जाए 

2. मां बाप के साथ अच्छा सुलूक किया जाए 3. औलाद को क़त्ल न किया जाए  4. बुराईयाों से बचा जाए 5. नाहक़ क़त्ल न किया जाए 6. यतीमों का माल न खाया जाए 7. नाप तौल में कमी न की जाए 8. बात करते वक़्त इंसाफ किया जाए 9. अल्लाह के अहद को पूरा किया जाए 10. सिराते मुस्तक़ीम ही की पैरवी की जाए


दूसरा हिस्सा 


सूरह आराफ़ की 87 आयात में ये पांच अहम बातें हैं


1. अल्लाह की नेमतें  2. चार निदाएं  3. जन्नतियों और जहन्नमियों का मुकालमा  4.अल्लाह की क़ुदरत के दलाइल

5. पांच क़ौमों के क़िस्से 


1. अल्लाह की नेमतें


1. क़ुरआन ए करीम  2. ज़मीन की रिहाइश  3. इंसानों की तख़लीक़  4. इंसानों का मस्जूद ए मलाइका होना 


2. चार निदाएं


सिर्फ इस सूरत में चार दफा अल्लाह ने "या बनी आदम" (ऐ आदम के बेटों) कह कर पुकारा है , पहली तीन निदाओं में लिबास का ज़िक्र है इसके तहत अल्लाह तआला ने मुश्रिकीन की रद कर दिया कि तुम्हें नंगे होकर तवाफ़ करने को अल्लाह ने हुक्म नहीं दिया जैसा कि उनका दावा था चौथी बार या बनी आदम कहकर अल्लाह ने रसूलुल्लाह ﷺ की पैरवी करने की तरगीब दी


3. जन्नतियों और जहन्नमियों का मुकालमा


जन्नती कहेंगे क्या तुम्हे अल्लाह के वादों का यक़ीन आया? जहन्नमी इकरार करेंगे, जहन्नमी खाना पीना मांगेगे मगर जन्नती उनसे कहेंगे : "अल्लाह तआला ने काफिरों पर अपनी नेमतें हराम कर दी हैं"... 


4. अल्लाह की क़ुदरत के दलाइल


बुलंद ओ बाला आसमान, फैली हुई ज़मीन व अर्श, रात और दिन का निज़ाम, चमकते चांद, सूरज और सितारे, हवाएं और बादल, ज़मीन से निकलने वाली नबातात (पेड़, पौधे) 


5. पांच क़ौमों के क़िस्से 


1. कौम ए नूह 2. कौम ए आद 3. कौम ए समूद 4. कौम ए लूत 5. कौम ए शोऐब 

इन क़िस्सों की हिक्मतें: 1. तसल्ली ए रसूल ﷺ

2. अच्छों और बुरों का अंजाम बताना 3. रिसालत की दलील की उम्मी होने के बावजूद पिछली क़ौमों के क़िस्से सुना रहे 

4. इंसानों के लिए इबरत व नसीहत

 सातवां पारा


इस पारे में दो हिस्से हैं 


1. सूरह माएदा की आखिरी 32 आयात

2. सूरह अनआम की इब्तेदाई 110 आयात


सूरह माएदा की आखिरी 32 आयात में तीन अहम बातें हैं


1. हबसा के नसारा (ईसाई) की तारीफ़

2. हलाल ओ हराम के चंद मसाइलह

3. आसमानी दरतरख्वान का क़िस्सा


1. हबसा के ईसाईयों की तारीफ़


जब उनके सामने क़ुरआन ए करीम की तिलावत की जाती है तो उनकी आंखें आंसुओं से तर हो जाती हैं उनकी दाढ़ियां तर हो जाती हैं और हिचकियाँ बंध जाती हैं


2. हलाल ओ हराम के चंद मसाइलह


1.किसी चीज़ को खुद से हलाल या हराम न बनाओ 

2.बिला इराद जो क़सम ज़बान पर ज़ारी हो जाए उसपर कोई मुवाखज़ह नहीं

3.क़सदन क़सम खाकर तोड़ देने का कफ्फारा ये है कि तीन में से कोई एक काम कर लिया जाे

दस मिस्कीनों को खाना खिलाया जाए या उन्हें पहनने के लिए कपड़े दे दिए जाएं या एक गुलाम आज़ाद कर दिया जाए और ये तीन काम न कर सकने की सूरत में तीन रोज़े रखे जाएं... 

अपनी क़सम की हिफाज़त करना ज़रूरी है बिलाज़रूरत क़सम तोड़ने की इजाज़त नहीं

शराब जुआं बुत और पांसा हराम है

हालत ऐहराम में खुश्की के जानवरजानवरों का शिकार करने की इजाज़त नहीं अलबत्ता समंदर का शिकार जाएज़ हैं... 

हरम में दाखिल होने वाले के लिए अमन है...

3. आसमानी दस्तरख्वान का क़िस्सा 


हवारिया ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम से कहा कि अल्लाह तआला से कहो कि हम पर ऐसा दस्तरख्वान उतारे जिस में खाने पीने की आसमानी नेमतें हों, ईसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह से दरख्वास्त की, अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया : मैं तुम पर वह दस्तरख्वान उतारूंगा सेकिन उसके बाद तुम में जो शख्स कुफ्र करेगा उसे मैं ऐसी सजाएं दूंगा जो दुनिया जहान में किसी भी शख्स को नहीं दूंगा... तिर्मिजी शरीफ की एक रिवायत के मुताबिक दस्तरख्वान उतारा गया और फिर जिन लोगों ने नाफरमानी की वह दुनिया में ही अज़ाब का शिकार हुए.. 


#दूसरा_हिस्सा 


सूरह अनआम की 110 आयात में तीन अहम बातें हैं :


1. तौहीद   2. रिसालत   3. क़यामत 


1. तौहीद 

इस सूरत में अल्लाह तआला की हम्द ओ सना और अज़मत ओ किबरियाई बयान हुई है 


2. रिसालत


इस सूरत में नबी ए करीम ﷺ की तसल्ली के लिए अल्लाह तआला ने अठारह अम्बिया ए कराम की ज़िक्र फरमाया है


3. क़यामत 


क़यामत के रोज़ अल्लाह तमाम इंसानों को जमा करेगा , रोज़ ए क़यामत किसी इंसान से अज़ाब का टलना उस पर अल्लाह की बड़ी मेहरबानी होगी 

मुश्रिकीन से मुतालबा किया जाएगा कि कहां है तुम्हारे शुरकाअ??? 

उस रोज़ जहन्नमी तमन्ना करेंगेकि कि काश! उन्हें दुनिया में लौटा दिया जाए ताकि वह अल्लाह रब की आयात को न झुठलाएं और ईमान वाले बन जाएं , दुनिया की ज़िन्दगी तो खेल और तमाशा है , आखिरत की ज़िन्दगी बहुत ज़्यादा बेहतर है...

 छठा पारा


इस पारे में दो हिस्से हैं 


1. सूरह निसा की आखिरी 29 आयात

2. सूरह माइदा की शुरू की 82 आयात


#पहला_हिस्सा 

सूरह निसा की आखिरी 29 आयात में तीन अहम बातें हैं


1. यहूद की मजम्मत  2. नसारा की मजम्मत  3. भाई बहनों की मीरास 


1. यहूद की मजम्मत 


यहूद के कई तरफ़ के ज़ुर्म ज़िक्र हुए हैं , इनका एक बड़ा ज़ुर्म हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को क़त्ल करने की कोशिश है , मगर अल्लाह तआला ने ईसा अलैहिस्सलाम को बहिफ़ाज़त आसमान पर उठा लिया 


2. नसारा की मजम्मत


ये लोग हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में इस क़दर गुलू का शिकार हुए की अक़ीदा ए तसलीस के मानने वाले हो गए तसलीस का मतलब ये है कि : अल्लाह तआला, हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और उनकी मां मरियम अलैहिस्सलाम तीनों को मअबूद (खुदा) समझने लगे... 


3. भाई बहनों की मीरास


अगर किसी मय्यत का ना बाप हो न औलाद तो उसके सगे और बाप शरीक़ भाई बहनों में विरासत का माल तक़सीम होने की सूरतें इस सूरह की आखिरी आयत में बयान हुई :

1. अगर मय्यत का सिर्फ भाई हो तो वह पूरे माल का वारिस होगा और एक से ज़्यादा हों तो उनमें सारा माल बराबर बटेगा... 

2. अगर सिर्फ एक बहन हो तो उसको आधा हिस्सा मिलेगा 

3. अगल बहनें एक से ज़्यादा हों तो उन्हें दो तिहाई मिलेगा

4. अगर बहनें भी हों और भाई भी हों तो भाई को बहन से दो गुना मिलेगा


#दूसरा_हिस्सा 

सूरह माएदा की 82 आयात में पांच अहम बातें हैं 


1. अहद  2. चार हराम चीज़ें  3. तहारत के मसाइल  4. क़िस्सा ए हाबील व क़ाबील  5. यहूद ओ नसारा की मजम्मत


1. अहद (वादा) 


हर अहद पूरा करो चाहे वह रब के साथ किया गया हो या इंसानों के साथ 


2. चार हराम चीज़ें 


मुरदार, बहने वाला खून, सुअर का गोश्त, गैरुल्लाह के नाम का जबीहा


3. तहारत के मसाइल


वज़ू के फराइज़ , गुस्ल और तयम्मुम के फराइज़ बयान किए गये हैं


4. हाबील और क़ाबील का क़िस्सा 


हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटों का क़िस्सा , क़ाबील ने हाबील को क़त्ल कर दिया था इसके तहत क़त्ल करने और चोरी के अहकामात ज़िक्र हुए हैं 


5. यहूद व नसारा की मजम्मत


ये लोग खुद को अल्लाह का बेटा कहते हैं, हालांकि इन पर अल्लाह का अज़ाब भी आता है और इनकी तरफ से जो सरकशी के वाक़्यात हुए हैं उन पर नबी अलैहिस्सलाम को तसल्ली दी गई , मुसलमानों को उनसे क़ल्बी दोस्ती करने से मना किया गया और हज़रत दाऊद व हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की ज़बानी उन पर अल्लाह की लानत ज़िक्र हुई और आखिरी में बताया गया कि यहूद और मुश्रिकीन तुम्हारे खतरनाक दुश्मन हैं... और हक़ीक़ी नसारा मुसलमानों के लिए नरम गोशा रखते हैं